Monday, 19 March 2012

संविधान का क्या होगा?

पूँजी सारी दी दहेज में, जली मगर फिर भी दुल्हन,
पुलिस और कानूनों के, ये इंतजाम का क्या होगा?
………………………………………………………..
पूँजी जिसके पास उसी के, हाथों में व्यापार सभी,
शोषित, पीड़ित, मजदूरों का, औ” किसान का क्या होगा?
…………………………………………………………
गुण्डों और डकैतों की तो, संसद रक्षा करती है,
है कानून खिलौना उनका, संविधान का क्या होगा?
………………………………………………………….
घर घर में ये मेघनाथ औ”, कुम्भकरण रावण देखे,
जितने रावण राम हों उतने, एक राम का क्या होगा?
…………………………………………………………
बेइमानों के हाथों में तो, जनता ने दे दी सत्ता,
बंदी, पीड़ित और उपेक्षित, इस ईमान का क्या होगा?
…………………………………………………………
पैसों से डिग्री मिल जाती, औ” आरक्षण से सर्विस,
बहुत पढ़ाई उसने की है, इंतिहान का क्या होगा?
………………………………………………………
……………………………………………………… 

24 comments:

  1. karari par marmik kya khen . mere biog ki nai post par svagat hae.

    ReplyDelete
  2. सच में क्या होने वाला है इन सब का ... अब तो भगवान ही मालिक है इन सबका ...

    ReplyDelete
  3. पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

    इन जलते सवालों से भरी अद्भुत रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

    नीरज

    ReplyDelete
  4. बेइमानों के हाथों में तो, जनता ने दे दी सत्ता,
    बंदी, पीड़ित और उपेक्षित, इस ईमान का क्या होगा?
    waah agrwal ji bahut hi yatharthvadi rachana....badhai

    ReplyDelete
  5. सार्थक और सामयिक पोस्ट, आभार.

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर रचना इस रचना के लिए आभार " सवाई सिंह "

    ReplyDelete
  7. आपकी रचना में जितने भी सवाल है
    शायद ही इनका जवाब इन नेताओ के पास होगा
    और अगर ऐसा होता तो इस देश का कायापलट होने में
    देर नहीं लगती ,,सबकुछ अच्छा होता...
    बहुत ही बेहतरीन रचना....

    ReplyDelete
  8. पैसों से डिग्री मिल जाती, औ” आरक्षण से सर्विस,
    बहुत पढ़ाई उसने की है, इंतिहान का क्या होगा?... sahi prashn

    ReplyDelete
  9. पैसों से डिग्री मिल जाती, औ” आरक्षण से सर्विस,
    बहुत पढ़ाई उसने की है, इंतिहान का क्या होगा?
    संविधान का क्या होगा ?एक ऊंचे पाए की विचार कविता है जो चुभती है सालती है .

    ReplyDelete
  10. बेइमानों के हाथों में तो, जनता ने दे दी सत्ता,
    बंदी, पीड़ित और उपेक्षित, इस ईमान का क्या होगा?

    bahut hi khoob soorat rachana .....yatharth ka darpan hai....abhar.

    ReplyDelete
  11. समसामयिक घटनाओ को झकझोरती कविता ! एक प्रश्न चिन्ह को इंगित ?

    ReplyDelete
  12. sachmuch vicharneey sithti hai..

    ReplyDelete
  13. पैसों से डिग्री मिल जाती, औ” आरक्षण से सर्विस,
    बहुत पढ़ाई उसने की है, इंतिहान का क्या होगा?

    बहुत बढ़िया रचना,सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन पोस्ट,....

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...

    ReplyDelete
  14. सार्थक सृजन, आभार.

    ReplyDelete
  15. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  16. वाह!!!!!!बहुत सुंदर रचना,अच्छी प्रस्तुति........

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

    ReplyDelete
  17. पैसों से डिग्री मिल जाती, औ” आरक्षण से सर्विस,
    बहुत पढ़ाई उसने की है, इंतिहान का क्या होगा?

    ReplyDelete
  18. सभी शेर सामयिक हैं, सच है...

    पैसों से डिग्री मिल जाती, औ” आरक्षण से सर्विस,
    बहुत पढ़ाई उसने की है, इंतिहान का क्या होगा?

    अच्छी रचना के लिए बधाई.

    ReplyDelete
  19. माफ़ी चाहूंगी आप के ब्लॉग मे आप की रचनाओ के लिए नहीं अपने लिए सहयोग के लिए आई हूँ | मैं जागरण जगंशन मे लिखती हूँ | वहाँ से किसी ने मेरी रचना चुरा के अपने ब्लॉग मे पोस्ट किया है और वहाँ आप का कमेन्ट भी पढ़ा |मैंने उन महाशय के ब्लॉग मे कमेन्ट तो किया है मगर वो जब चोरी कर सकते है तो कमेन्ट को भी डिलीट कर सकते है |मेरा मकसद सिर्फ उस चोर के चेहरे से नकाब उठाने का है | आप से सहयोग की उम्मीद है | लिंक दे रही हूँ अपना भी और उन चोर महाशय का भी, इन्होने एक नहीं मेरी चार रचनाओ को अपने नाम से अपने ब्लॉग मे पोस्ट किया है
    http://div81.jagranjunction.com/author/div81/page/4/


    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.in/2011/03/blog-post_557.html

    ReplyDelete
    Replies
    1. कृपया मेरी १५० वीं पोस्ट पर पधारने का कष्ट करें , अपनी राय दें , आभारी होऊंगा .

      Delete
  20. वाह!!!!बहुत सुंदर प्रस्तुति,..प्रभावी रचना,..

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: गजल.....

    ReplyDelete
  21. बहुत खूब लिखा है इस रचना के लिए आभार
    बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर..

    Active Life Blog

    ReplyDelete
  22. गुण्डों और डकैतों की तो, संसद रक्षा करती है,
    है कानून खिलौना उनका, संविधान का क्या होगा?

    bilkul sahi aur samayik, badhai

    ReplyDelete
  23. kabhi mere blob me bhi aayen aur apni rai de aabhari rahunga.
    link-http://kpk-vichar.blogspot.in

    ReplyDelete