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Monday, 19 March 2012

संविधान का क्या होगा?

पूँजी सारी दी दहेज में, जली मगर फिर भी दुल्हन,
पुलिस और कानूनों के, ये इंतजाम का क्या होगा?
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पूँजी जिसके पास उसी के, हाथों में व्यापार सभी,
शोषित, पीड़ित, मजदूरों का, औ” किसान का क्या होगा?
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गुण्डों और डकैतों की तो, संसद रक्षा करती है,
है कानून खिलौना उनका, संविधान का क्या होगा?
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घर घर में ये मेघनाथ औ”, कुम्भकरण रावण देखे,
जितने रावण राम हों उतने, एक राम का क्या होगा?
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बेइमानों के हाथों में तो, जनता ने दे दी सत्ता,
बंदी, पीड़ित और उपेक्षित, इस ईमान का क्या होगा?
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पैसों से डिग्री मिल जाती, औ” आरक्षण से सर्विस,
बहुत पढ़ाई उसने की है, इंतिहान का क्या होगा?
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Friday, 23 December 2011

आओ फिर से देश बनायें।

सांसद बड़े बड़ी या जनता।
सांसद को ये कौन है चुनता।।
संसद में यह प्रश्न खड़ा है।
चुने जो सांसद वही बड़ा है।।
सांसद जो कानून बनायें।
जनता से न पूछा जाये?
जनता को जनता से संसद।
जनता हित संसद का मतलब।।
जो जनता के काम न आये।
जनता को बेवकूफ बनाये।।
ऐसी संसद हमें न भाये।
क्यों न और व्यवस्था लायें।।
संसद में गुण्डे हैं कुछ-कुछ।
वह ही नेता हुये निरंकुश।।
इनको अब है सबक सिखाना।
इन्हें न अब संसद पहुँचाना।।
किये हैं जिन-जिन ने घोटाले।
उनके चेहरे करना काले।।
संसद से वापस बुलवाकर।
इन सबको तिहाड़ पहुँचाकर।।
आजादी का जश्न मनायें।
आओ फिर से देश बनायें।।